Tuesday, 17 May 2016

दो शेर

आज आपके समक्ष दो शेर प्रस्तुत करने की इच्छा हुई.

१.
उनकी दोस्ती का कहर.. कुछ इस कदर बरपा हम पर
के अब जी सकते हैं न मर सकते हैं

अरे दुश्मन होता तो दो-दो हाथ भी कर लेते
पर उस सितमगर के आगे तो.. सर भी नही उठा सकते हैं.

२.
उन्हें शिकायत है हमसे
कि हम उनसे कतराते हैं
कोई उनसे ये तो पूछे कि वो
हमे करीब ही कब बुलाते हैं.

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ये दोनों शेर मैंने अपने स्नातक शिक्षण काल (1989-1992) में लिखे थे.

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