चिड़िया सी ही होती हैं लड़कियां,
तभी तो चहकती हैं I
उसी मीठी चहक से तो मायके की,
सब वीथीयां महकती हैं II
दे देती हैं अपने पर,
मायके की कल्पनाओं को I
और कर देती हैं शेष समर्पित,
ससुराल की संभावनाओं को II
दारुण हृदय से मायका निभाता,
परिपाटी कन्यादान की I
ससुराल भी फिर सौंप देता है उसे,
धरोहर कुल के सम्मान की II
सृष्टि में ये दायित्व दो ही हैं सम्हालते,
या तुम लड़कियां या यह वसुंधरा I
जोड़ने, सहेजने, संवर्धन को ही तो,
ईश्वर ने तुम सी शक्ति का सृजन करा II
तभी तो चहकती हैं I
उसी मीठी चहक से तो मायके की,
सब वीथीयां महकती हैं II
दे देती हैं अपने पर,
मायके की कल्पनाओं को I
और कर देती हैं शेष समर्पित,
ससुराल की संभावनाओं को II
दारुण हृदय से मायका निभाता,
परिपाटी कन्यादान की I
ससुराल भी फिर सौंप देता है उसे,
धरोहर कुल के सम्मान की II
सृष्टि में ये दायित्व दो ही हैं सम्हालते,
या तुम लड़कियां या यह वसुंधरा I
जोड़ने, सहेजने, संवर्धन को ही तो,
ईश्वर ने तुम सी शक्ति का सृजन करा II