Sunday, 28 August 2016

चिड़िया सी ही होती हैं लड़कियां.......

चिड़िया सी ही होती हैं लड़कियां,
तभी तो चहकती हैं I            
उसी मीठी चहक से तो मायके की,
सब वीथीयां महकती हैं II

दे देती हैं अपने पर,
मायके की कल्पनाओं को I
और कर देती हैं शेष समर्पित,
ससुराल की संभावनाओं को II

दारुण हृदय से मायका निभाता,
परिपाटी कन्यादान की I
ससुराल भी फिर सौंप देता है उसे,
धरोहर कुल के सम्मान की II

सृष्टि में ये दायित्व दो ही हैं सम्हालते,
या तुम लड़कियां या यह वसुंधरा I
जोड़ने, सहेजने, संवर्धन को ही तो,
ईश्वर ने तुम सी शक्ति का सृजन करा II

Sunday, 14 August 2016

एक तिरन्गा

नहीं निकलते सज-धज के हम रोज़ाना अपने ही गलियारों में ।

होली-दिवाली की तारीखें भी ढून्ढते हैं हम पोथी और अखबारों में ।।


जीना होगा देश भक्ति को अपनी सान्स के तारों में।

तो क्यों न लगा डाले...एक तिरन्गा अपने छत-चौबारे में।।