आज मैं हिंदी में 'कलाम' लिखता हूँ
उर्दू आती नही पर दिल-से-सलाम लिखता हूँ I
होती होगी आप जैसी ही कुरान की आयत
इसीलिए पुरज़ोर और पुरशान लिखता हूँ II
शिद्दतो-मेहनत की शख्सियत रही है आपकी
आज हिन्दुस्तान बिन आपके हुआ हलकान, लिखता हूँ I
हीरा हो, मोती हो, जवाहर हो या कोई रत्न
इन सबों का भी आपको 'कप्तान' लिखता हूँ II
काफिर हूँ, छूना चाहता हूँ मैं पैर आपके, पर
आपको सच्चा मुसलमान लिखता हूँ I
वतन का क़र्ज़ चुकाने का हुनर सीखे कोई आपसे, मगर
नही चुका पायेगा आपका एहसान ये हिंदुस्तान, लिखता हूँ II
उर्दू आती नही पर दिल-से-सलाम लिखता हूँ I
होती होगी आप जैसी ही कुरान की आयत
इसीलिए पुरज़ोर और पुरशान लिखता हूँ II
शिद्दतो-मेहनत की शख्सियत रही है आपकी
आज हिन्दुस्तान बिन आपके हुआ हलकान, लिखता हूँ I
हीरा हो, मोती हो, जवाहर हो या कोई रत्न
इन सबों का भी आपको 'कप्तान' लिखता हूँ II
काफिर हूँ, छूना चाहता हूँ मैं पैर आपके, पर
आपको सच्चा मुसलमान लिखता हूँ I
वतन का क़र्ज़ चुकाने का हुनर सीखे कोई आपसे, मगर
नही चुका पायेगा आपका एहसान ये हिंदुस्तान, लिखता हूँ II
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